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melody mangalwar kasoor movie songs copied from noorjahan

मेलोडी मंगलवार: 'कसूर' फिल्म का ये गाना आफ़ताब शिवदासानी के 'जनम' से 5 साल पहले तैयार कर लिया गया था!

'खुदा करे के मोहब्बत में वो मकाम आए 
 किसी का नाम लूं, लब पे तुम्हारा नाम आए' 

                        -तस्लीमफाज़ली  (पाकिस्तान से इम्पोर्टेड लाईनें हैं) 
 

'कसूर'। फिल्म आई थी 2001 में। तब हम मिडिल स्कूल भी नहीं पहुंचे थे। हां, इतना याद है घर में गाने सुनता था। बाज़ार में आस-पास से गुजरने वाली गाड़ियों में गाने खूब बजते थे। जीप, जोंगा से लेकर ट्रेक्टर तक में लगे बाजे में गाने बजते थे। और ये कसूर और गुनाह वाला दौर था। मतलब अलका याग्निक, सोनू निगम, उदित नारायण वाला दौर। मल्लब हिसाब इतना था कि ये गाने कहीं बजे नहीं कि मोहल्ले में 2-4 नए आशिक तो पैदा हो ही जाने हैं। तब लिरिक्स का जिक्र नहीं होता था। हमारे आस-पास।

बस जितना सुनता समझता था उससे ये समझ आता था कि जो गाया जा रहा है। वो बेहद ही शानदार गाया जा रहा है। सुनने वाले की चमड़ी सही सलामत होती लेकिन कलेजे में जीती चमड़ी कुरेद लिए जाती है। जिसके बाद लाल खुनी हल्का रिसता हुआ कलेजा रह जाता है।  

जैसे ये गाना है। गुनाह फिल्म का। पहली बार स्कूल वाले कंप्यूटर में दिखाया गया था। गलती से चल गया था, किसी से! 



हम अभी उत्ते बड़े नहीं हुए थे कि मोहब्बत में कलेजा काट आशिक हो जाते। लेकिन जब बड़े हुए और मोहब्बत नाम की बला से मुलाकात हुई तो कसम मानिए ये वो ही गाने थे जिन्होंने हमारी सीडी स्पेस में सबसे ज्यादा जगह पाई थी। या फिर इन्हीं गानों ने मोहब्बत से मुलाक़ात कराई थी। अल्ताफ राज़ा तब टूटे दिल आशिक की आवाज़ लगते थे। हमें तो मोहब्बत की चासनी में सराबोर कर देने वाले आवाज़ की जरूरत होती थी। 

अब लिरिक्स और म्युज़िक नाम की बला भी समझ में आने लगी थी। कॉलेज जाते ही दो-चार ऐसे कलाकार मिल ही जाते हैं। जो आपसे गाने की बात-चीत जिक्र करेंगे तो पहले लिरिक्स फिर उसके पीछे की आवाज़ और म्युज़िक की तारीफ़। ये वो लोग होते हैं जो मंझे हुए आशिक होते हैं। 

तब हमें समझ आ रहा था कि समीर सिर्फ समीर नहीं समीर साहब हैं। आनंद बख्शी सिर्फ आनंद बख्शी नहीं आनंद बख्शी साहब हैं। और भी दूसरे। लेकिन जब और पढ़ने लगा जानने लगा इस बारे में तब पता चला कि नहीं ये भी कॉपी कर सकते हैं। सिर्फ प्रीतम पर ही म्युज़िक ककी चोरी का आरोप नहीं लगना चाहिए। और भी हुए हैं 'फन्ने खां' विद ड्यू रेस्पेक्ट। आज उन्हीं में से दो-तीन दिखा रहा हूं। 

गाना नंबर-1 

 

2001 की फिल्म कसूर का गाना: दिल मेरा तोड़ दिया उसने बुरा क्यूं मानूं 
इस गाने की लिरिक्स दी थी समीर ने 
म्युज़िक नदीम-श्रवण का था और 
गया था अल्का याग्निक जी ने

 


वीडियो: 



ये गाना जब ऑरिजिनल रिकॉर्ड हुआ था। साला था 1973। और जब 2002 में कसूर में आया तब आफ़ताब शिवदासानी इसमें हीरो थे। और इनका जन्म हुआ था 1978 में। माने इनके 'जनम' से भी 5 साल पहले ही ये गाना रिकॉर्ड कर लिया गया था। 

सुनिए ऑरिजिनल गाना। जिसे गाया था मल्लिका-ए-तरन्नुम, नूरजहां साहीबा ने। और लिरिक्स शायद क़तील शिफ़ाई साहब ने! और ये गाना था पाकिस्तानी फिल्म असमत का! 

 

वीडियो: 


 

ऐसे एक नहीं दसियों हैं। जैसे एक और बता रहा हूं।


1997 में एक फिल्म आई थी 'सनम'। संजय दत्त थे, मनीषा कोइराला भी थीं। विवेक मुशरन थे। इस फिल्म का एक गाना है जिसे पंकज उधास साहब ने गाया था। 

गाना है: खुदा करे के मोहब्बत में वो मकाम आए
इसकी लिरिक्स भी समीर ने ही दी थी और
म्युज़िक दिया था आनंद-मिलिंद ने! खूब हिट हुआ था। 

 

वीडियो: 

इस गाने को भी नूरजहां साहिबा ने 1971 में ही एक पाकिस्तानी फिल्म के गा लिया था। मेहंदी हसन साहब का भी गाया एक वर्ज़न है। 


अभी मल्लिका की आवाज़ में पहले सुनें। 


वीडियो: 

मेहंदी हसन साहब की आवाज़ में! 

देखिए, लिस्ट बनाता जा रहा हूं। और ये खत्म हो नहीं रही। जितने गाने सामने आ रहे हैं। वो सब के सब बॉलीवुड में कॉपी किए गए हैं। तभी तो कहता रहता हूं, मैं। पाकिस्तान इतना भी बुरा नहीं जितना हम समझते हैं। वहां से भी हमें बहुत कुछ मिला है। भले ही चोरी से! 

आज के मेलोडी मंगलवार में इतना ही, मिलेंगे अगले मंगलवार फिर किसी और किस्से के साथ!  

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Synopsis
मेलोडी मंगलवार: 'कसूर' फिल्म के इस गाने को आफ़ताब शिवदासानी के जनम से 5 साल पहले ही तैयार कर लिया गया था!