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om puri an awesome actor and person who showed bollywood a new face of acting

ओमपुरी: क्लर्क का काम किया और फिर बॉलीवुड में परचम लहराया अपने खुरदरे गालों के साथ!

'मैं ऐसे लोकतंत्र में विश्वास नहीं करता जो ग़रीबों की इज्ज़त करना नहीं जानता'

-गोविंद सूर्यवंशी, चक्रव्यूह


ओम पुरी। आवाज़ जिसकी पहचान थी। घुप्प भुचंड अंधेरे में भी अगर एक बार आवाज़ लगा दे तो बिलासक बता सकता हूं कि ये ओम साहब ही थे। साल 2016 के अक्टूबर महीने में राकयेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म आई, मिर्ज़या! इस फिल्म के ट्रेलर के आखिर में एक आवाज़ आती है। 


जो कह रहा होता है...

'होता है अक्सर होता है...इश्क में अक्सर होता है, चोट कहीं लगती है...जाकर...ज़ख्म कहीं पर होता है'


इतना सुनते ही मैंने कह दिया था। इस फिल्म को देखने की एक वज़ह चाहिए थी जो मिल गई। वज़ह ये लाईनें नहीं थी। वज़ह थी इसके पीछे की आवाज़। जो थी ओमपुरी साहब की। 

ओमपुरी का जन्म हुआ था हरियाणा के अंबाला शहर में। साल था 1950। महीना अक्टूबर का। तारीख थी 18 अक्टूबर। पिता जी पहले आर्मी में थे, बाद में  रेलवे जॉइन कर लिया। अंबाला शहर से बाद में पुरी साहब पटियाला आ गए। पटियाला में बाकी की स्कूली पढ़ाई की। वहीं के खालसा कॉलेज से फिर ग्रेजुएशन भी किया। और एक्टिंग का बेसिक गुर भी वहीं सीखा।  




इनके एक्टिंग जॉइन करने का किस्सा भी बड़ा ही दिलचस्प है। कॉलेज में इनकी एक्टिंग देखने के बाद। वहीं एक प्ले ग्रुप चलाने वाले साहब ने इन्हें पकड़ा। इसके निर्देशक थे हरपाल टेवाना। जो कि खुद ही 'एनएसडी' से ग्रेजुएट थे। प्ले ग्रुप का नाम था पंजाब कला मंच। वो इनकी एक्टिंग के इतने मुरीद हुए कि उन्होंने इनसे अपने प्ले ग्रुप को जॉइन करने को कहा। 

ओमपुरी साहब ने अपनी मजबूरी सुना दी। पूछा क्या मजबूरी है, भाई। साहब मैं तो इवनिंग के वक़्त कॉलेज करता हूं और दिन के वक़्त कॉलेज में ही लैब असिस्टेंट का काम करता हूं। उन्होंने पूछा भाई पैसे कितने मिल जाते हैं। कॉलेज में काम करके? जवाब था, 125 रुपए। टेवाना साहब ने कहा, ठीक है चलो मैं तुम्हें 150 रुपए दूंगा। तुम आना शुरू करो। और फिर यहां से शुरू हुआ एक्टिंग का सिलसिला। 

फिर एक सरकारी दफ़तर में कलर्क की नौकरी मिली। वो भी किया साथ में थोड़ी बहुत एक्टिंग भी करते रहे। जब कुछ वक़्त तक थिएटर करने के बाद 'एनएसडी' जाने का विचार हुआ तो टेस्ट दिया। एंट्री मिल गई।

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यहां से शुरू हुई असली दिक्कत...

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Synopsis
ओमपुरी: ऑफिस में क्लर्क का काम किया और फिर बॉलीवुड में परचम लहरा दिया अपने खुरदरे गालों के साथ!