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After this answer of Swami Vivekananda no American dares to question Indians

बर्थ-डे स्पेशल: स्वामी विवेकानंद के इस जवाब के बाद भारतीयों पर सवाल उठाने से कतराते हैं अमेरिकन

12 जनवरी 1963 को कोलकाता में पैदा हुए नरेन्द्रनाथ दत्त एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। तीव्र बुद्धि और स्मरण शक्ति वाले नरेन्द्र ने बहुत कम उम्र में संन्यास ले लिया और विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हो गए। स्वामी विवेकानंद सिर्फ एक प्रेरणादायक संन्यासी नहीं थे बल्कि क्रांतिकारी विचारक और उच्च कोटि के वक्ता भी थे। उन्होंने हमेशा देश के युवाओं का आह्वान किया, इसलिए उनके जन्मदिवस को भी युवा-दिवस के नाम से मनाया जाता है। उन्होंने सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया 

इसके साथ ही वह देश के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व किया।



वो मौका था 1893 'विश्व धर्म-सम्मलेन' का जहां दुनिया भर के धर्मों के प्रतिनिधि अपने धर्म पर भाषण देने पहुंचे थे । स्वामी विवेकानंद भी विभिन्न बाधाओं को पार कर उस सम्मलेन में पहुंचे। जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'अमेरिका के भाइयों और बहनों' के संबोधन के साथ की तो कई मिनटों तक सभा तालियों की गड़गड़ाहट के साथ गूंजती रही। 
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स्वामी जी का सरल जवाब

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Synopsis
स्वामी जी ने सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया, इसके साथ ही वह देश के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व किया।