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mumbai cab driver helped a women late in night who was being harassed

इस कैब ड्राईवर ने देर रात एक लड़की के लिए जो किया, इसे ये दोनों कभी भूल नहीं पाएंगे


जरूरी तो नहीं सारे हीरो पजामे के ऊपर चड्डी पहन के आएं। जरूरी तो नहीं हर हीरो यूनिफ़ॉर्म में ही हो। और ये भी जरूरी नहीं इंसान की अगर उम्र ढल गई हो तो वो गुंडों को भगा नहीं सकता। भरोसा नहीं हो रहा तो ये किस्सा सुनो। ये जो ऊपर बड़ी सी तस्वीर दिख रही है ना बैनर में, उसे एक बार फिर से ध्यान से देखो। येही हैं वो हीरो जिन्होंने अपनी टैक्सी में बैठे-बैठे ही 3-4 लफंगों को भागने पर मजबूर कर दिया। सबसे पहले इनके नाम की एक सलामी ठोंक दो। हमारी तरफ से भी इन्हें Firkee सलाम पहुंचे। 
 

पूरी कहानी कहानी क्या है...? 


फेसबुक पर एक पेज है ह्यूम्न्स ऑफ़ बॉम्बे'। ऐसे ही लोगों के किस्से कहानियां बताती रहती है। दो दिन पहले ही ये वाला पोस्ट आया। क्या लिखा है पोस्ट में वो हम आपको वैसे का वैसा पढ़ा रहे हैं। हिंदी में ट्रांसलेट करके। 

"मैं ये कैब पिछले 35 सालों से चला रहा हूं। मैं बूढ़ा हो गया हूं लेकिन मुझे अब भी खुद के लिए कमाना होता है। इतने सालों में कई तरह के एक्सपीरिएंस मिले-- ये शहर कितना अच्छा और किस हद तक घाटिया हो सकता है। कभी -कभार आप जैसे लोग आकर बात कर लेते हैं। तो हमें भी लगता है हम इंसान हैं। फिर कुछ ऐसे भी हैं जो आते हैं और हम पर चीखते हैं, चिल्लाते हैं। उन्हें जल्दी होती है लेकिन ट्रैफिक भी होता है। 

कुछ टाइम पहले की बात है। राटा के करीब 12।30 बजे होंगे। मैंने देखा एक लड़की, जिसकी उम्र 25 से कम होगी। बस स्टॉप से आगे बढ़ रही थी शायद घर की तरफ।। ये मुंबई की उन गलियों में से एक था जहां ज्यादा लोग नहीं होते हैं। मैंने उसे ध्यान से देखा क्योंकि वो बहुत परेशान सी दिख रही थी। और जब मैंने उसके पीछे देख तो उसके पीछे 2-3 आदमी चल रहे थे, कभी सिटी बजा रहे थे। और वो सब शराब पिए हुए थे। वो उसका नाम भी पुकार रहे थे। फिर वे लोग तेजी से उस लड़की का पीछा करने लगे। मैं अब भी सड़क के दूसरी तरफ था। फिर जब मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने लगातार हॉर्न बजाना शुरू कर दिया। और फिर मैं लगातार हॉर्न बजाता रहा। हॉर्न की आवाज़ से वे लोग चौकन्ने हो गए। और वो तुरंत दूसरी तरफ भागने लगे। मैंने सड़क पार किया फिर, फिर उस लड़की से कहा कि मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं। वो बहुत डरी हुई थी, वो पूरी पिली सी हो गई थी। मैं चुप-चाप गाड़ी चलाता रहा। करीब 2-3 मिनट के बाद कॉर्नर पर ही उसका घर था।


लेकिन जैसे ही वो गाड़ी से बाहर निकली उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और रोने लगी। मुझे बार-बार शुक्रिया कह रही थी। मैंने कहा भी कि कोई बात नहीं। कोई और भी होता तो मैं उसकी भी मदद करता। फिर उसने मुझसे थोड़ी देर बाहर रुकने को कहा। वो अंदर गई और अंदर से मीठाई का एक पूरा डब्बा लाकर मुझे पकड़ाया और कहा इसे अपने घरवालों के लिए ले जाऊं। मैंने उसका शुक्रिया अदा किया और चला गया। मैं उसे ठीक से जानता भी नहीं था। कोई 10 मिनट के लिए उससे मुलाकात हुई थी।  लेकिन मुझे नहीं लगता मैं वो रात कभी भी भूल पाऊंगा।"


ये रहा 'ह्यूम्न्स ऑफ़ बॉम्बे' का ऑरिजिनल पोस्ट: 






आपको हमको सभी को इस तरह के हालत में लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहना होगा. फिर देखिए चीज़ें कैसे बदलेंगी. एक बार अपने स्वार्थपने से बाहर निकल कर किसी की मदद करके तो देखिए। बहुत ही सुकून मिलता है। अंदर से। बाकी पैसे तो विजय माल्या ने भी कमाए हैं! समझ रहे हैं ना! 

पढ़ते रहिए Firkee,in, हमारे आस पास अच्छी बातें भी हो रही हैं, बस नज़र खुली रखने की जरूरत है! 

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Synopsis
देर रात घर जाती लड़की को गुंडों से छिड़ने से बचाया इस कैब ड्राईवर को firkee सलाम