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बांग्लादेश की इकलौती रिक्शेवाली, जो समाज के हर तबके को आईना दिखा रही हैं

बांग्लादेश के इतिहास और भूगोल के बारे में तो हम ज्यादा नहीं कह सकते हैं लेकिन इतना ज़रूर कहेंगे कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय लगभग खत्म होने को है। यहां का इतिहास जरा ख़ौफनाक रहा है जिसका असर अब भी दिखता है। अब बात मुस्लिम बहुसंख्यक देश की है और उसमें भी बात है उस औरत की जिसने जिंदगी में 'हार' शब्द को जाना ही नहीं। जिसने हमेशा ये कहा कि जिस काम में इंसान को रुचि होती है उस काम से इंसान थक कैसे सकता है? 

इरादे बुलंद हैं और देह फौलादी। इस औरत का नाम है मोसम्मत। मुस्लिम बहुसंख्या वाले इस देश को एशिया के सबसे पिछड़े समाजों में गिना जाता है, लेकिन मोसम्मत इस समाज की दकियानूसी सोच की परवाह नहीं करती हैं। 

मोसमम्त को रिक्शा चलाते हुए 5 साल हो गए इनके 3 बच्चे हैं। जिनकी पूरी जिम्मेदारी मोसम्मत पर ही है। अपने बच्चों को पालना पोषना और साथ ही पढ़ाई लिखाई सब अकेले संभाल रही हैं मोसम्मत। लेकिन एक सवाल तो हर किसी के मन में आएगा कि आखिर सारा भार ये अकेले क्यों संभालती है!! तो इसके पीछे भी वजह है..
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मोसम्मत जैसमीन

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Synopsis
मोसम्मत रिक्शा चलाकर अपने बच्चों को पढ़ा रही हैं..

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