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Hindi Diwas Special: on Such specific moment people used to speak hindi

डर के आगे हिंदी है, इन मौकों पर बड़े से बड़े अंग्रेजों के मुंह से भी निकलती है शुद्ध खांटी हिंदी

हिंदुस्तान में अंग्रेजी के प्रति दीवानगी अंग्रेजों के जाने के बाद जैसे बढ़ गई। कोर्ट कचहरी से लेकर हर दफ्तर में लिखने-पढ़ने की भाषा अंग्रेजी हो गई। यहां तक की हिंदी पट्टी की बसों में टिकट भी अंग्रेजी में ही छपा होता है। गांव का कउआ भी अगर अंग्रेजी में कांव कर दे तो उसके प्रति भी लोगों में आकर्षण देखते ही बनता है। अंग्रेजी के चार शब्द टिपिर-टिपिर करने पर जैसे लोगों में किसी अंग्रेज अफसर की आत्मा घुस जाती है, ऐसा महसूस होता है। लेकिन कितना भी बड़ा अंग्रेज हो (ये वाला हिंदी पट्टी का), कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जब वह हिंदी में अपने आप आ जाता है। हिंदी दिवस पर खास हम ये परिस्थियां यहां गिना रहे हैं। अगर आपके पास भी कुछ सुझाव हों तो हमारे कमेंट्स बॉक्स में साझा करें।
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सोते से जगाने पर

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हिंदुस्तान में अंग्रेजी के प्रति दीवानगी अंग्रेजों के जाने के बाद जैसे बढ़ गई। कोर्ट कचहरी से लेकर हर दफ्तर में लिखने-पढ़ने की भाषा अंग्रेजी हो गई।

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