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china diary: Know about china

चीन डायरीः चीन जैसा सुना था और जैसा देखा

जब मैं चीन को एक आम भारतीय के नजरिए से देखता हूं  तो एक ऐसे देश का ख्याल आता है जिसके तमाम उत्पादों ने जिसने हाल के वर्षों में भारत के बाजारों में अपनी गहरी पैठ बना ली है और जो एक साथ प्रेम, ईर्ष्या, स्पर्धा और कभी-कभी विरोधी सा बन जाता है। वहीं, कुछ के लिए चीन तकनीक और प्रगति में सारी दुनिया से लोहा लेता हुआ देश है, लेकिन बहुतेरे लोगों के लिए जानकारी के अभाव में चीन की कहानियां बहुत पुरानी हैं मतलब कि उनके लिए चीन एक गरीब पिछ्ड़ा देश है आज भी, तो मेरे लिए चीन एक आश्चर्य था।

पहाड़ी प्रदेश में पैदा होने के कारण मैं कई बार अपने गांव से उत्तर दिशा की ओर जाने वाले हवाई जहाज को देखकर सोचता था कि यह है चीन देश का। बचपन में चीन मेरे लिए परी कथा वाला देश था, क्योंकि कालिदास के “अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा हिमालयोनाम नगाधिराज:” की भाषा में समझूं तो मेरी बचपन की दुनिया का भूगोल मेरे गांव उत्तर के पहाड़ से खत्म हो जाता था।

धीरे-धीरे इस भूगोल की व्याप्ति कुछ हुई तो नंदा देवी की बर्फीली चोटियों को देखने के बाद तो मेरे लिए उत्तर दिशा का अंतिम छोर आ चुका था। जीवन के कुछ आगे के सालों में चीन निवासी बर्फीले इलाके में, कम लम्बाई वाले, गोल-गोल  मुंह वाले, गोरे रंग के लोग मेरी कल्पना के पात्र थे और इसको साकार समझने के लिए दादी और कुछ बुजुर्गों की कहानियां मदद करती थी।

हमारे जिले के उत्तर में बसे मुनस्यारी में रहने वाले भोटिए की कद काठी सा रूप-रंग-आकार बताकर दादी ने चीन वासियों के कुछ काल्पनिक चित्र उस समय मेरे दिमाग में भर दिए थे। भोटिए लोगों के बारे में जो थोड़ी बहुत स्मृति उस समय की है वह थी कुछ मसालों, नमक आदि सामान के साथ आने वाले और धान, गेहुं, भट, मसूर के बदले में ले जाने वाले लोगों की। ये लोग जब हमारे गांव-घरों से आते जाते थे तो एक अपनत्व और आश्चर्य भाव भी बन गया था।

मेरी कल्पना के ये चीनी नागरिक जब इतिहास की पुस्तकों में ह्वेनसांग बनकर आए तो उनके चित्रों से चीन निवासियों के कुछ चित्र बनने लगे। फिर पुस्तकों, अखबारों से होते हुए फिल्मों और बाद में टेलीविजन तक कुछ वैसे रूप आकार के लोग दिखते तो चीन निवासियों के बारे में कुछ चित्र बनकर आते जाते रहे। धीरे-धीरे तकनीक की दुनिया ने दुनिया भर के लोगों को देखना- दिखाना आसान कर दिया तो मेरे लिए चीन वासियों को पहचानना आसान हो गया। अब मैं चीन पहुंचा हूं फरवरी 2017 में। जीवन के पांच दशक से अधिक समय पूरा करने के बाद और वह भी दुनिया के सर्वाधिक आधुनिक शहरों में से एक शहर शंघाई में । आगे पढ़ें

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Synopsis
चीन डायरी में हम आपके लिए लाए हैं चीन से जुड़ी तमाम जानकारियां और ऐसी बातें जिनसे आप अभी तक अनजान हैं....

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